Seekers will always find a way to get to the truth and the only way to truth is through knowledge. But how is one supposed to get knowledge? The answer is simple: by being curious;and the best part about being curious is that it feels like being a kid again. Welcome to my blog, where I present to you my knowledge comprising interesting facts, narratives,descriptions and imagery in the most concise way possible. Stay curious folks!

Clovis Acosta Fernandes- Face of Brazilian Football Fans

क्लोविस का जन्म ब्राज़ील में ही हुआ | फेर्नान्देज़ एक अच्छे बिजनेसमैन थे पर उनका फुटबॉल के प्रति प्रेम भी उतना ही अधिक था | क्लोविस ब्राज़ीलियाई फुटबॉल में काफी रूचि रखते थे और लगभग ब्राज़ील के सभी मैच देखने जाते थे |

क्लोविस का जन्म 4 अक्टूबर वर्ष 1954 में हुआ था | बह एक अलग ही शक्सियत है जिन्हें शायद पूरा ब्राज़ील जानता होगा | उन्होंने देश प्रेम के साथ साथ अपनी पसंदीदा खेल फूटबाल के लिए जो प्रेम दिखाया है वो अतुल्निय है |


क्लोविस का जन्म ब्राज़ील में ही हुआ | फेर्नान्देज़ एक अच्छे बिजनेसमैन थे पर उनका फुटबॉल के प्रति प्रेम भी उतना ही अधिक था | क्लोविस ब्राज़ीलियाई फुटबॉल में काफी रूचि रखते थे और लगभग ब्राज़ील के सभी मैच देखने जाते थे |


उन्होंने लगभग अपनी पूरी जिंदगी में लगभग 150 से भी ज्यादा ब्राज़ील के फुटबॉल मैच स्टेडियम में जाके देखे है और इसके लिए उन्हें लगभग 30 देशो में जाना पड़ा था |

जब 1990 में फूटबॉल विश्वकप इटली में हुआ था तब से ही क्लोविस ब्राज़ील के लगभग सारे मैच देख रहे है और उन्होंने 1990 से ब्राज़ील का एक भी विश्वकप मैच नहीं छोड़ा चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी देश जाना पड़ा हो | और शायद यही वजह है की उन्हें ब्राज़ील फूटबॉल का दूसरा चेहरा भी कहते है | करीब 1990 में ही उन्होंने ब्रजील फुटबॉल का एक फेन क्लब बनाया जिसका नाम Gauchos na Copa रखा |


वह विश्वकप के हर मैच में विश्वकप ट्राफी की प्रतिक्रति लेके आते थे | वह 2014 विश्वकप के बाद बहुत प्रसिद्ध हो गए जब ब्रजील जर्मनी से सेमी फाइनल हर गया | उस वक़्त उनको स्टेडियम में रोता हुआ भी देखा गया | इस मैच में जर्मनी ने ब्राज़ील को 7-1 से हराया था जिसके बाद वह बहुत निराश नजर आ रहे थे | उनके साथ बेठे कुछ और ब्राज़ीलियाई प्रशंषको ने भी उन्हें रोते हुए देखा था | मैच खत्म होने के बाद उन्होंने ट्राफी की प्रतिकति को एक जर्मन प्रशंशक को देते हुए उससे कुछ अलफ़ाज़ कहे और फिर स्टेडियम से चले गए | बाद में जर्मनी ने वह विश्वकप जीत लिया था |



विश्वकप के एक साल बाद 16 सितम्बर 2015 को उनका निधन हो गया | तब शायद ब्रजील ने अपने सबसे फुटबॉल प्रशंशक को खो दिया था | परन्तु अब उनके बच्चे अपने पिता की प्रथा को आगे बढ़ाते हुए रूस पहुँच गए है अपने देश ब्राज़ील को समर्थन करने के लिए | 

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आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन बिहार विभूति डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह जी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।। :)

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