Seekers will always find a way to get to the truth and the only way to truth is through knowledge. But how is one supposed to get knowledge? The answer is simple: by being curious;and the best part about being curious is that it feels like being a kid again. Welcome to my blog, where I present to you my knowledge comprising interesting facts, narratives,descriptions and imagery in the most concise way possible. Stay curious folks!

Satoshi Tajiri- The Pokémon Man (in Hindi)

सतोशी तजीरी जापान के एक बहुत बड़े वीडियो गेम डेवलपर्स में से एक है | इनका जन्म 28 अगस्त 1965 में मचिदा, टोक्यो, जापान में हुआ था | उन्होंने बहुत सरे गेम्स डिजाईन किये मगर उनमें से सबसे ज्यादा पोकेमोन और मारिओ लोकप्रिय हुए | उन्होंने बहुत कम उम्र में ही गेम डिजाइनिंग कंपनी Game Freak में काम करना शुरू किया जिसकी वजह उनका विडियो गेम्स के प्रति लगाव था |

सतोशी तजीरी जापान के एक बहुत बड़े वीडियो गेम डेवलपर्स में से एक है | इनका जन्म 28 अगस्त 1965 में मचिदा, टोक्यो, जापान में हुआ था | उन्होंने बहुत सरे गेम्स डिजाईन किये मगर उनमें से सबसे ज्यादा पोकेमोन और मारिओ लोकप्रिय हुए | उन्होंने बहुत कम उम्र में ही गेम डिजाइनिंग कंपनी Game Freak में काम करना शुरू किया जिसकी वजह उनका विडियो गेम्स के प्रति लगाव था |



सतोशी को बचपन से ही कीड़े और छोटे पशुओं और पक्षियों को पकड़ने का शौक था | और वह बड़े होके इसी क्षेत्र में आगे जाना चाहते थे पर ऐसा हो न सका | उन्होंने लगभग 2 बार में अपनी हाई स्कूल की पड़ी पूरी की और उसके बाद कोई नौकरी करने की जगह वह Tokyo National College of Technology चले गए जहाँ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटर में 2 साल का डिप्लोमा कोर्स किया |



महज 17 साल की उम्र में उन्होंने Game Freak के लिए काम करना शुरू किया | उन्होंने पहले कंपनी के लिए मैगज़ीन लिखने का काम किया | तजीरी उसमें पोकेमोनो को बनाते और उनके बारे में लिखते थे | तजीरी को आर्कड़े गेम्स से खासा लगाव था, जिसके चलते ही उन्होंने पोकेमोन पर काम करना शुरू किया | उन्हें बचपन से ही कीड़े पकड़ने का शौक था जो की उन्होंने इस गेम में भी दिखाया | ये काम उन्होंने केम सुगिमोरी के साथ शुरू किया जिन्होंने की पोकेमोन गेम शुरू होने के बाद पहले 150 पोकेमोनो के बारे में बताया था |



अब सतोशी एक मैगज़ीन लेखक से ज्यादा गेम डेवलपर बन चुके थे | उन्होंने 1989 में गेम फ्रिक को गेम डेवलपर कंपनी की तरह से प्रयोग किया | 1990 में उन्होंने अपना मह्त्वकंशी गेम पोकेमोन पर काम शुरू किया और उन्हें इसे पूरा करने में 6 साल का वक़्त लगा, पर इसपे किसी ने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया | पर धीमे धीमे इस गेम ने रफ़्तार पकड़ी और यह बच्चो के बीच में काफी प्रसिद्ध हो गया | पर इस गेम में एक कमी थी जब कोई पोकेमोन हरता था तो वो मर जाता था | जिसमें की बाद में बदलाव किया गया | पोकेमोन को मरने की जगह थका हुआ हो जाता था | बाद में इस बदलाब से गेम को काफी फायदा हुआ और गेम की लोकप्रियेता और बड गयी | 

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