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What is IRDAI in Hindi

IRDAI (Insurance Regulatory and Development Authority of India) एक स्वतन्त्र सबसे ऊँची संवेधानिक संसथान है जो की पुरे देश में Insurance policies को देखती है | यह संसथान संसद सत्र के act Insurance Regulatory and Development Authority Act, 1999 के अंतर्गत संसद सभा से पारित हुआ और इसको भारतीय सरकार ने भी हरी झंडी दी | इस संसथान का Headquarter Hyderabad, Telengana में है जो की Delhi से 2001 में शिफ्ट हो गया था |



IRDAI (Insurance Regulatory and Development Authority of India) एक स्वतन्त्र सबसे ऊँची संवेधानिक संसथान है जो की पुरे देश में Insurance policies को देखती है | यह संसथान संसद सत्र के act Insurance Regulatory and Development Authority Act, 1999 के अंतर्गत संसद सभा से पारित हुआ और इसको भारतीय सरकार ने भी हरी झंडी दी | इस संसथान का Headquarter Hyderabad, Telengana में है जो की Delhi से 2001 में शिफ्ट हो गया था |


IRDA के आने से Insurance policies को एक सही तरीके से लोगो के सामने लाया गया | इस authority के आने का असर कुछ ऐसा हुआ की सभी फर्जी insurance companies ने अपना बोरिया बिस्तरा बांध लिया जिसका की आम जनता को काफी फायदा भी हुआ | इसे लोगो को पता चला की कोई भी company policy में कितने से कितना फायदा दे सकती है| और अगर कोई IRDAI के मानको से ज्यादा बियाज देने का लालच दे रहा है तो समझ ली जिए की वोह आप से धोका कर रहा है |

IRDA में आज के समय में 49 % की FDI लिमिट है जो की 26 % से बड़ा कर 49 % कर दी गयी थी जुलाई 2014 में |

  भारत में insurance का बहुत ही पुराना इतिहास रहा है | जो की कई सदियों से ऐसा ही चला अ रहा था | साहूकार अपने फायदे के हिसाब से नियम बनाते थे जिसमें उन्हें ज्यादा मुनाफा होता था और ग्राहक को नुकसान होता था | परन्तु उस समय पर कुछ ऐसे नियम कानून नहीं थे जो की उन साहुकारो को अपनी मन मर्ज़ी करने से रोक सके | उसी समय की परंपरा कलयुग तक चली आयी |
जब भारत आजाद हुआ तोह कोई ऐसे कानून नहीं थे की कितने समय पे कितने पैसे पर कितना बियाज देना है या और भी जो नियम होते है | तब भी साहूकार अपनी मन मर्ज़ी करते थे | पर कुछ समय बाद जब सरकार को ऐसा लगा की अब साहुकारो की मन मर्ज़ी ज्यादा बड गयी तभी LIC की स्तापना हुई|  LIC (Life Insurance Corporation) की स्तापना होते ही सब काम सही से चलने लगे पर धीमे धीमे साहूकार लोगो ने अपना बिज़नस दुबारा जमाना चालू किया |

जब सरकार को ऐसा लगा की इन सब मामलो को देखने के लिए कोई authority होनी चाइये तब 1999 में IRDA act आया जिसके अन्दर IRDAI की स्तापना हुई | जो की अब insurance से जुडी सारी चीज़ें देखता है |

अब अगर आपको कोई भी बैंक या बैंक के किसी भी कार्य की जानकारी चाइये हो या कोई बैंक कर्मी आपका कोई भी काम करने के लिए रिश्वत मांग रहा हो या आपका काम करने के लिए मना कर रहा हो तो अप उसकी शिकायत IRDAI के दफ्तर में कर सकते है | Authority तुरंत ही उस व्यक्ति पर करवाई करगी |


IRDAI आपके काम के लिए कभी मना नहीं करेगी न ही कभी आपको कोई फ़ोन करेगी | न ही कभीं आपसे कभी पैसो की कोई भी मांग करेगी अगर आपके पास कोई ऐसे फ़ोन कॉल आती है तो अब उसकी शिकायत पुलिस में कर सकते है| पुलिस उस पर उचित कार्येवाई करगी |    
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