Ashwani Pundhir

Seekers will always find a way to get to the truth and the only way to truth is through knowledge. But how is one supposed to get knowledge? The answer is simple: by being curious;and the best part about being curious is that it feels like being a kid again. Welcome to my blog, where I present to you my knowledge comprising interesting facts, narratives,descriptions and imagery in the most concise way possible. Stay curious folks!

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पल्स्टिक जितना हमे सहूलियत प्रदान करती है उतना ही हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचती है | आज के युग में हर छोटे बड़े काम में प्लास्टिक का प्रयोग होता ही है जिस कारण पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है | एक बात जो सबसे ज्यादा परेशान करने वाली है वो यह है की इसको नष्ट नहीं किया जा सकता है, या तो पुनः प्रयोग में लिया जा सकता है या फिर पुनर्नवीनीकरण करके प्रयोग किया जा जकता है |


प्लास्टिक की सबसे बड़ी बात यह है की यह हमारे जीवन में अपनी जगह बना चूकी है अब चाहे कितना भी छोटा काम क्यों न हो हमे प्लास्टिक की जरुरत पड़ जाती है जैसे की प्लास्टिक ही बोतले | हम जहाँ भी जाते है यह बोतल हमारे साथ ही जाती है | इनमें कुछ अच्छी प्लास्टिक की होती है और कुछ थोड़ी बेकार प्लास्टिक की |


हम में से अधिकतर लोग अच्छी बोतलो को रख लेते है और ख़राब वाली को फ़ेंक देते है और यह समस्या ज्यादातर सार्वजनिक स्थानों पे आती है जैसे की रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन | इन बोतलो की समस्या को दूर करने के लिए हाल ही में रेलवे ने एक सशक्त कदम उठाया है | रेलवे ने एक प्राइवेट कंपनी के साथ मिल के एक मशीन तैयार की है जिसमें की बोतल को डालने पर उसके टुकड़े टुकड़े हो जाते है |


अभी यह मशीन सिर्फ पानी की बोतलें नष्ट करने के लिए तैयार की गयी है पर जल्दी ही इसमें थोड़े बदलाब करके इसमें और भी तरह की बोतल नष्ट की जा सकेंगी | हाल ही में दक्षिण पश्चिमी रेलवे के बेंगलुरु डिवीज़न ने इस अपने चार स्टेशनों पे शुरू किया है जिसमें की KSR सिटी स्टेशन, छावनी स्टेशन, क्रिश्नाराज्पुरम स्टेशन और येश्वन्तपुर स्टेशन पे शुरू किया है | इस मुहीम को विश्व पर्यावरण दिवस के दिन शुरू किया गया | इस मुहीम के बाद स्टेशनों पर पानी की खाली बोतल दिखना कम हुई है और साथ में सफाई का स्तर भी बड़ा है |


इससे पहले यह मशीन पुणे स्टेशन, मुंबई स्टेशन, अहमदाबाद स्टेशन पे पहले ही लगायी जा चुकी है | इस मुहीम में लोगो का समर्थन पाने के लिए रेलवे ने एक बोतल को क्रश करने पे 5 वॉलेट में देने का सिस्टम भी शुरू किया है जिसके तहेत आपको मशीन में जाके अपनी खली पानी की बोतल को डालना जिसके बाद मशीन आपसे फ़ोन नंबर मांगेगी, जिसके बाद मशीन अपने आप उसी नंबर पे आपको 5 PAYTM कर देगी | इस मशीन में एक दिन में लगभग 5000 बोतलों को क्रश किया जा सकता है | 

ग्रीन लेक अपने नाम से ही बता देती है की इससे यह नाम क्यों दिया गया है | इस झील के चारो तरफ हरी भरी वादियाँ है जो की इस झील को एक अलग ही नजारा प्रदान करती है | इस झील का पानी काफी साफ़ और हरे पन्ने के रंग का है, जिस वजह से ही इसका नाम ग्रीन लेक रखा गया है |


यह झील ऑस्ट्रिया के स्टायरिया शेहर में है और साथ ही हूच्सच्वाब पहाडियों से घिरा हुआ है | इस झील में पानी हिमनदों के पिघलने की वजह से आता है जिस वजह से इस झील का पानी बहुत ज्यादा साफ़ होता है और साथ ही पानी का तापमान अमूमन 6-7c तक रहता है |


सर्दियाँ में जब तापमान कम होता है तो झील के पानी की गहराई 1-2 मीटर तक रहती है | उस वक़्त लोग यहाँ लगी कुर्सियों पे बेठ कर धुप का लुफ्त उठाते है | और जैसे जैसे मौसम गरम होना शुरू होता है वैसे वैसे हिमनदों के पिघलने की वजह से यहाँ का पानी का स्तर बड़ने लगता है | मध्य जून में इस झील का पानी का स्तर सबसे अधिक 10-12 मीटर तक होता है | उस वक़्त यहाँ राखी सभी कुर्सियां और झीले पे बना हुआ पुल सब पानी के निचे डूब जाते है |

गर्मियों का मौसम गोताखोरों के लिए सबसे अच्छा होता है | इस मौसम में बहुत बड़ी संख्या में यहाँ गोताखोर आते है | जैसे जैसे जुलाई का महीना खत्म होने को आता है वैसे ही झील के पानी का स्तर फिर से गिरने लगता है | यहाँ पे कई प्रकार की मछलियाँ, केकड़े और घोंघे पाए जाते है |


हलाकि यहाँ पे कुछ समय में ही काफी ज्यादा पर्यटन बड़ा है जिससे की झीले के रख रखाब में बाधा आ रही थी और साथ में इससे यहाँ पानी भी गन्दा हो रहा था जिस वजह से सरकार को कई कड़े कदम उठाने पड़े जिनमें से एक था सभी प्रकार के पानी के खेलो पे प्रतिबन्ध जो की 1 जनवरी 2016 को लागु किया गया |  

हारबर आइलैंड बहमास देश का एक टापू है जो की अपने अनोखी समुन्द्र तट के लिए विख्यात है | यह टापू बहमास देश के सबसे प्रसिद्ध टापुओ में से एक है | इस टापू पे सिर्फ एक ही जिला है जिसका नाम बहमास के पूर्व राज्यपाल के नाम पे रखा गया था जो की इस टापू पे गर्मियों में रहने आते थे |


डानमोर इस द्वीप का इकलौता जिला है जिसकी आबादी करीब 2000 के आस पास है | यह जिला अपने सुन्दर भवन और अपनी अनोखी सडको के लिए भी प्रसिद्ध है | डानमोर का नाम बहमास के पूर्व राज्यपाल जॉन मुर्रे के नाम पे पड़ा था जो की डानमोर वंश के चौथे वंशज थे |


हारबर अपने अनोखी गुलाबी रेत वाली तट के लिए विख्यात है जो की सिर्फ यही पाई जाती है | यह जगह पर्यटकों के बीच काफी प्रसिद्ध है और यहाँ सबसे अधिक अमेरिकी पर्यटक आते है जो की इन तटों का जम के मज़ा लेते है | यहाँ आने की कई साधन है परन्तु जो सबसे ज्यादा विख्यात है वो है पहले हवाई सफ़र जिससे की आप  एलयूठेरा आइलैंड पे पहुच जायेंगे जहाँ पे एक हवाई अड्डा है औए वहां से फिर एक छोटी सी जहाज की सवारी जो की आपको ले आयेगी गुलाबी रेत वाले टापू पे |


इस द्वीप पे सबसे प्रसिद्ध होटल है जो की एक अंग्रेजी कलाकार ब्रेट किंग और उनकी पत्नी शेरोन ने 1960 में बनवाया था जिसका नाम कोरल सेंड्स होटल है, यह यहाँ के सबसे प्रसिद्ध और अच्छे होटलों में से एक है |

रिचर्ड हैरिसन अपने दौर के बहुत बड़े गिरवी दलाल थे | उन्होंने अपने बेटे और पोते के साथ एक गिरवी की दुकान खोली जो की देखते देखते ही बहुत बड़ी व मशहूर हो गयी | हैरिसन का जन्म वर्जिनिया के एक बहुत ही गरीब घराने में हुआ था | रिचर्ड जब छोटे थे तब उनका परिवार पैसे कमाने के चक्कर में उत्तरी कैलिफ़ोर्निया में जा बसा |



रिचर्ड एक गरीब घराने से तलूक रखते थे जिसका असर उनकी पढाई पे भी पड़ा जिस वजह से उन्हें अपनी पढाई छोडनी पड़ी | अपने परिवार को आर्थिक रूप से मद्द करने के लिए उन्होंने 14 साल की उम्र में ही एक स्कूल बस चलाना शुरू किया जो की उन्ही के घर खाड़ी होती थी | उस बस को चलने के लिए उन्हें हफ्ते के 6-7 डॉलर मिलते थे |


ऐसे ही उम्र बढती गयी और वह इसके साथ और भी कुछ छोटे छोटे काम करने लगे | जब वह करीब 16 साल के थे तब उन्होंने एक डांस क्लब जाना शुरू किया जहाँ उनकी मुलाकात उनकी होने वाली पत्नी से हुई जिनका नाम जोआन रहुई था जो की एक जज की बेटी थी | इसके बाद 1960 में इन दोनों ने शादी कर ली | शादी से कुछ वक़्त पहले ही हैरिसन ने एक गाड़ी चुरायी थी जिस केस में उन्हें जज ने दो रास्ते दिए या तो वो जेल जाये या फिर मिलिट्री में लग जाये | हैरिसन ने मिलिट्री को चुना | शादी के एक साल बाद ही उन्हें एक बेटा हुआ |


जिसके बाद उन्होंने करीब 20 साल मिलिट्री और नेवी में काम किया जिस दौरना उन्होंने 4 जहाजो में काम किया | इस बीच उनके बेटे ने जमीन के खरीद व बेच का काम शुरू किया जिसमें उन्हें ज्यादा फायदा नहीं हुआ और उन्हें वो बिज़नस बंद करना पड़ा | इस बिज़नस के बंद होने के बाद वह सब लॉस वेगास में जा के बस गए जहाँ इन्होने एक सामान गिरवी रखने की दुकान खोली जिसमें ज्यादातर सोने चांदी के गहने ही होते थे |

जब इनका काम अच्छा चलने लगा तो इन्होने अपनी दुकान को एक बड़ी दुकान में शिफ्ट कर दिया और साथ में पुराने सामान की खरीद व बेचने की भी सरकार से अनुमति ले ली | जिसके बाद इनकी दुकान का कार्यक्रम ‘PAWN STARS’ HISTORY CHANNEL पे भी आने लगा जिसका इनके बिज़नस पे बहुत असर पड़ा | जहाँ दिन के 60 ग्राहक आते वही अब इनके पास दिन के 700 ग्राहक आने लगे | जैसे जैसे यह कार्यक्रम आगे बाड़ा इसने नाम कमाना शुरू कर दिया और यह चैनल का सबसे लोक प्रिये कार्यक्रम बन गया |


हैरिसन उनके बेटे और उनके पोते, यह तीनो इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण थे | कार्यक्रम के दौरान रिचर्ड को ‘THE OLD MAN’ के नाम से भी बुलाते थे | 25 जून 2018 को रिचर्ड का निधन हो गया |

क्लोविस का जन्म 4 अक्टूबर वर्ष 1954 में हुआ था | बह एक अलग ही शक्सियत है जिन्हें शायद पूरा ब्राज़ील जानता होगा | उन्होंने देश प्रेम के साथ साथ अपनी पसंदीदा खेल फूटबाल के लिए जो प्रेम दिखाया है वो अतुल्निय है |


क्लोविस का जन्म ब्राज़ील में ही हुआ | फेर्नान्देज़ एक अच्छे बिजनेसमैन थे पर उनका फुटबॉल के प्रति प्रेम भी उतना ही अधिक था | क्लोविस ब्राज़ीलियाई फुटबॉल में काफी रूचि रखते थे और लगभग ब्राज़ील के सभी मैच देखने जाते थे |


उन्होंने लगभग अपनी पूरी जिंदगी में लगभग 150 से भी ज्यादा ब्राज़ील के फुटबॉल मैच स्टेडियम में जाके देखे है और इसके लिए उन्हें लगभग 30 देशो में जाना पड़ा था |

जब 1990 में फूटबॉल विश्वकप इटली में हुआ था तब से ही क्लोविस ब्राज़ील के लगभग सारे मैच देख रहे है और उन्होंने 1990 से ब्राज़ील का एक भी विश्वकप मैच नहीं छोड़ा चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी देश जाना पड़ा हो | और शायद यही वजह है की उन्हें ब्राज़ील फूटबॉल का दूसरा चेहरा भी कहते है | करीब 1990 में ही उन्होंने ब्रजील फुटबॉल का एक फेन क्लब बनाया जिसका नाम Gauchos na Copa रखा |


वह विश्वकप के हर मैच में विश्वकप ट्राफी की प्रतिक्रति लेके आते थे | वह 2014 विश्वकप के बाद बहुत प्रसिद्ध हो गए जब ब्रजील जर्मनी से सेमी फाइनल हर गया | उस वक़्त उनको स्टेडियम में रोता हुआ भी देखा गया | इस मैच में जर्मनी ने ब्राज़ील को 7-1 से हराया था जिसके बाद वह बहुत निराश नजर आ रहे थे | उनके साथ बेठे कुछ और ब्राज़ीलियाई प्रशंषको ने भी उन्हें रोते हुए देखा था | मैच खत्म होने के बाद उन्होंने ट्राफी की प्रतिकति को एक जर्मन प्रशंशक को देते हुए उससे कुछ अलफ़ाज़ कहे और फिर स्टेडियम से चले गए | बाद में जर्मनी ने वह विश्वकप जीत लिया था |



विश्वकप के एक साल बाद 16 सितम्बर 2015 को उनका निधन हो गया | तब शायद ब्रजील ने अपने सबसे फुटबॉल प्रशंशक को खो दिया था | परन्तु अब उनके बच्चे अपने पिता की प्रथा को आगे बढ़ाते हुए रूस पहुँच गए है अपने देश ब्राज़ील को समर्थन करने के लिए | 

मैनहटनहेंज एक बहुत ही अद्भुत नजारा होता है | जो की साल में दो बार ही देखा जाता, यह नजारा मैनहटन की मुख्य सड़क पर देखा जाता जो की न्यू यॉर्क में है | इस द्रश्य को मैनहटन अयनांत भी कहते है | मैनहटनहेंज को सडको के पूर्वी या पश्चिमी कोनो से देखा जा सकता है |


मैनहटनहेंज का नजारा बहुत ही लोकप्रिय है | इस नज़ारे में सूर्योदय होते वक़्त या सूर्यास्त होते वक़्त सूर्य सड़क के बिलकुल बीचो बीच होता है | यह नजारा सूर्यास्त के वक़्त तब देखा जाता है जब साल में दिन सबसे लम्बे चल रहे होते है (29 मई से 12 जुलाई तक) और सूर्योदय के वक़्त यह नजारा तब देखा जाता है जब राते सबसे लम्बी चल रही होती है (6 दिसम्बर से 5 जनवरी तक) |


इस द्रश्य का नाम मैनहटनहेंज एक खगोल भौतिक वैज्ञानिक Neil deGrasse Tyson की वजह से पड़ा जो की इस संदार्व में ही कुछ खोज कर रहे थे | जब वर्ष 1811 में शहर का नक्शा बना तो उस नक़्शे को 29̊ तक पश्चिम की तरफ घुमा दिया गया ताकि मैनहटन शहर की मुख्य सड़क उस जगह आ जाये जहाँ आज वो है |


मैनहटनहेंज का सटीक समय इस बात से पता लगाया जा सकता है की वर्ष में सबसे लम्बा दिन कोनसा होगा और सबसे लम्बी रात कोंसी होगी | जब यह नजारा सटीक समय पे देखा जाता है तो ऐसा लगता है की सूरज मैनहटन के क्षितिज से निकल रहा हो | इस मंजर का नजारा साल में चार बार देखा जा सकता है दो बार सूर्योदय के वक़्त और 2 बार सूर्यास्त के वक़्त |


इस तरह का नजारा कुछ और जगहों पे भी देखा जाता है जहाँ पर सड़के एक ही रेखा में बनी हो और उन सडको से क्षितिज बिना किसी रुकावट के देखा जा सके | और साथ में सड़के या तो बिलकुल पूर्व पश्चिम दिशा में हो या फिर बिलकुल उत्तर दक्षिण दिशा में हो | बाल्टीमोर, शिकागो, टोरंटो, मोंट्रियल, कैंब्रिज, मैसाचुसेट्स इन जगहों पे भी यह नज़ारा देखा जाता है | परन्तु सबसे ज्यादा प्रसिद्ध मैनहटनहेंज ही है |

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