Ashwani Pundhir

Seekers will always find a way to get to the truth and the only way to truth is through knowledge. But how is one supposed to get knowledge? The answer is simple: by being curious;and the best part about being curious is that it feels like being a kid again. Welcome to my blog, where I present to you my knowledge comprising interesting facts, narratives,descriptions and imagery in the most concise way possible. Stay curious folks!

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कवई मछलियाँ एक तरह की घरेलू मछलियाँ होती है जिन्हें की तालाबो और मछलीघरो में रखा जाता है | यह मछलियाँ साफ़ पानी में रहने वाली होती है | इन मछलियों में कई प्रकार के रंग और आकृतियाँ होती है | और इनकी पहचान भी अपने रंग और डिजाईन की वजह से ही होतीं है, यही कारण है की इन्हें मछलीघरो में रखा जाता है | यह ज्यादातार लाल, हरे, काले, सफ़ेद, पीले और नीले रंग में होती है | परन्तु अब संकरण की वजह से इनमें और भी बहुत सरे रंग देखे जाते है |


कवई मछलियों में सबसे विख्यात प्रजाति है गोसंके कवई | यह मछलियाँ ठन्डे पानी वाली होती है और यह अपने आस पास के माहोल में बहुत जल्दी घुल मिल जाती है | इनही कारणों से इन्हें घरो में रखा जाता है | यह मछलियाँ अपने आप को वातावरण के अनुकूल बना लेती है जिस कारण इनकी ज्यादा देख भाल भी नहीं करी पड़ती है |


इन मछलियों का रंग हर युग के साथ और भी विकसित होता जाता है | और इनकी तव्चा पे और भी अद्भुत तरह की आकृतियाँ विकसित हो रही है | इन मछलियों की लम्बाई लगभग 3 - 3.30 फीट तक होती है | यह अपनी अधिकतम लम्बाई हासिल करने से पहले हर रोज लगभग 1 सेंटीमीटर तक बढती है | इनके शारीर के आकार में कोई खास विवधता नहीं होती है और लगभग सभी एक ही आकार में विकसित होती है, बस यह अपने रंग और आकृतियों में अलग अलग होती है |


इन मछलियों की प्रतिरक्षा शक्ति बहुत कम होती है | हालांकि यह मछलियाँ ठन्डे पानी में रहने वाली होती है परन्तु अगर पानी का तापमान 10 ̊c के निचे जाता है तो उस तापमान में इन मछलियों का बच पाना बहुत मुश्किल होता है | 15̊-25 ̊c तक का तापमान इनके लिए उपयुक्त होता है | कवई मछलियाँ अपना खाना पानी के अन्दर ही खा लेती है परन्तु जब से इन्हें मछलीघरो और तालाबो में पाला जाने लगा तब तब से इन मछलियों ने पानी के ऊपर आके खाना खाना सीख लिया है | पानी के ऊपर खाना देना का एक और मकसद था ताकि इन मछलियों की बिमारियों और संक्रमण को जाँचा जा सके |


 अब इन मछलियों ने अपने आप को इतना विकसित कर लिया है कि यह खाना खिलने वाले व्यक्ति को पहचान लेती है और अपने आप ही पानी के ऊपर आ जाती है | अब तो इन मछलियों को इतना सिखा दिया गया है कि यह पानी से छलांग लगा कर खुद हाथ से खाना ले लेती है |

एलन रीव मस्क का जन्म 28 जून 1971 को साउथ अफ्रीका में हुआ था | वह एक बहुत ही प्रसिध संस्थापक, इंजिनियर, डिज़ाइनर और निवेशक है | वह हमेशा ही मानव कल्याण और नई सोच में विश्वास रखते है | जिसका जीता जगता उधारण है space X. वह space X के संस्थापक और मुख्य डिज़ाइनर भी है |



space X के साथ ही वह Tesla के भी  सह संस्थापक है, साथ में सोलरसिटी के चेयरमैन भी  है | उनका नाम  विश्व के जाने माने लोगो में शुमार है | 2016 में, FORBES  ने उन्हें विश्व  के सबसे ताक़तवर लोगो की सूची में 21वे नंबर पे रखा था |

उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढाई के बाद Stanford University में पीएचडी में दाखिला लिया पर 2 साल बाद ही यूनिवर्सिटी छोड़ दी और व्यवसाय में अपना करियर शुरू करने का इरादा कर लिया | जिसकी शुरुआत उन्होंने अपनी पहली कंपनी खोल के की जिसका नाम था ‘ज़िप2’ जो की एक  वेब सॉफ्टवेयर कंपनी थी | कुछ समय बाद कॉम्पैक ने इसे खरीद लिया, इसके बाद मस्क ने एक और कंपनी खोली X.com जो की एक ऑनलाइन पेमेंट कंपनी थी | बाद में यह कांफिनिटी के साथ मर्ज हो गयी और इसका नया नाम रखा गया PayPal. जो की आज कल बहुत ही मशहुर कंपनी है ऑनलाइन पैसे ट्रान्सफर करने के लिए |



अपने इन शुरुआती कंपनीयों के बाद उन्होंने एक नई कंपनी खोली ‘Space X’ जो की अन्तरिक्ष में आने जाने वाले विमान बनाती है, मस्क इस कंपनी के सीईओ और मुख्य डिज़ाइनर भी है | इसके बाद 2003 में आयी कंपनी ‘Tesla’ के भी वह सह संस्थापक है | Tesla अपनी इलेक्ट्रॉनिक गाडियों के लिए पुरे विश्व में मशहूर है | इसके बाद 2006 में, पुरे विश्व में बड़ते प्रदुषण और जल वायु परिवर्तन को देखते हुए उन्होंने सोलरसिटी की शुरुआत की जो की अब टेस्ला की अंतर्गत की काम  करती है |



मस्क यही नहीं रुके और एक के बाद एक नई कंपनी खोलते गए जिसमें की OpenAl, Neuralink, और The Boring Company ज्यादा मशहूर है |



मस्क ने एक Hyper loop नाम का मॉडल भी त्यार किया है जो की एक हाई स्पीड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम है और इसके साथ ही एक वर्टीकल टेक ऑफ़ और लैंडिंग सुपरसोनिक जेट इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट का मॉडल भी त्यार किया है जिसका नाम उन्होंने मस्क इलेक्ट्रिक जेट रखा है |


 हाल ही में उन्होंने अपनी कार टेस्ला रोडस्टर को अन्तरिक्ष में भेजा है | अपने इनही कामो के चलते उन्हें इस दुनिया का ‘आयरन मेन’ भी कहते है |


विक्टर का जन्म 4 जनवरी, 1890 में ऑस्ट्रिया में हुआ था | वह हमेशा से ही पढाई लिखाई में रूचि नहीं रखते थे | बल्कि उन्हें हमेशा से ही कुछ जोखिम भरे काम करने में मज़ा आता था | उनको काफी सारी भाषाओ का ज्ञान था जो की उनके काम में उनकी मद्द करता था |



उन्होंने अपने ठगी से भरे भविष्य की शुरुआत समुद्र में आने जाने वाले जहाजो में ठगी चालू करी और उससे काफी पैसा कमाया और जब उन्हें यह आभास होने लगा की अब उनकी धोका ज्यादा दिन नहीं चल पायेगी तो उन्होंने कुछ नया करने का सोचा | विक्टर ने अपने जीवन में बहुत सारी धोके बजी की है पर कुछ किस्से ऐसे है जिन्हें सुनके लोग दांग रह जाते है |



विक्टर ने एक बार नकली नोट बनाने की मशीन को बेचने का काम किया | उन्होंने यह मशीन काफी सरे लोगो को बेचीं | विक्टर पहले इस मशीन से लोगो को नकली नोट के सैंपल निकाल के दिखता और उन्हें लोगो को बेच देता था | मशीन की बनावट कुछ इस प्रकार थी की वह कुछ समय तक तो मशीन नोट को प्रिंट करती थी पर उसके बाद खली कागज देती थी | मशीन का घोटाला उन्होंने बहुत लोगो के साथ किया और इसके बाद वो पेरिस चले गए | पेरिस जाके उन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी ठगी की |


पहला विश्व युध खत्म होने के बाद फ्रांस अपने आप को युध में हुए नुकसान से उभार रहा था, तब कुछ शेहरो का खर्चा निकालना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा था, उन शेहरो में एक शेहर पेरिस भी था, और ऐसे में एइफ्फेल टावर जैसी बड़ी ईमारत के देख रेख में सरकार काफी पैसा खर्च कर रही थी, और यह सरकार के लिए चिंता का सबब बना हुआ था | इस बात का फायदा उठाने का ख्याल विक्टर के मन में आया |
विक्टर ने कुछ फर्जी सरकारी दस्तावेज़ बनवाए और कुछ छे लोहा व्यापारियों के साथ एक बैठक राखी और वो भी समय के पेरिस के सबसे बड़े होटलों में से एक de Crillon में, जिससे की किसी को शक न हो | Lustig ने उन व्यापारियों के सामने ख़त और डाक बिभाग के उपमहानिदेशक के तौर पर बैठक की और उन व्यापारियों को इस बैठक को गोपनीय रखने को बोला | उन्होंने सरकार का हवाला देते हुए कहा की सरकार नहीं चाहती की यह बात अभी आम जनता को पता चले | Lustig ने उन व्यापारियों के साथ एइफ्फेल टावर का दौरा भी किया, ताकि उन व्यापारियों को पक्का विश्वास हो जाये की एइफ्फेल टावर बिकने वाला है |



उन सब व्यापारियों में से एक था आंद्रे पोइस्सों जो की बाकि व्यापारियों से थोडा व्यापर में थोडा कमजोर था और यह बात विक्टर को पता थी | कमजोर व्यापर होने की वजह से आंद्रे टावर को खरीदने के लिए राज़ी हो गया | इस सौदे में विक्टर ने बहुत सारा पैसा कमाया और गायब हो गया | इस ठगी से आंद्रे डिप्रेशन में चला गया और ठगी की शर्म के चलते किसी से कुछ नहीं किया |

इस घटना के करीब छे महीने बाद विक्टर दुबारा पेरिस आया और एक बार फिर से एइफ्फेल टावर को बेचने के लिए मीटिंग की पर इस बार बेचने से पहले ही पुलिस ने व्यापारी की शिकायत पर उसे पकड़ लिया | इस तरह Lustig ने लगभग दूसरी बार भी एइफ्फेल टावर बेच ही दिया था |


आगे जाके विक्टर ने और भी बहुत सारी धोके बजी और ठगी की पर वह अपनी एइफ्फेल टावर वाली ठगी की लिए बहुत ज्यादा मशहूर हुए | और उन्हें एक नए नाम से भी जाना जाने लगा, “The Man Who Sold The EIFFEL TOWER Twice.”


श्रीनिवास रामानुजन इयांगर भारत के महानतम गणितज्ञ में से एक थे | उनका जन्म 22 दिसम्बर वर्ष 1887 में कोयम्बटूर के ईरोड गाँव में हुआ था | रामानुजन का बचपन आम बच्चो जैसा नहीं था, उन्होंने तीन साल की उम्र में बोलना सिखा  वह बचपन से ही पढाई में काफी निपुड थे | हलाकि उनका मान पढाई में काम लगता था फिर भी वह अपनी कक्षा में सबसे अधिक अंक लाते थे | आगे की शिक्षा के लिए वह टाउन स्कूल चले गए | रामानुजन को बचपन से ही सवाल पूंछने का बहुत शौक था |


रामानुजन काफी शांत सौभाव के व्यक्ति थे | उनका कभी अपनी कक्षा में किसी के साथ कोई झगडा नहीं हुआ | वह सभी से बड़ी शांति और आदर के साथ बात करते थे | उनका यह सौभाव उनके अध्यापको और सहपाठियों पर एक गहरा असर छोड़ रहा था | उनके अच्छे अंक आने के कारण उनको छात्रवृति भी मिलने लगी | जब वह 11वी कक्षा में पहुंचे तो उनका गणित से लगाव इतना बड गया था की उन्होंने अपने बाकि के विषयों पे ध्यान देना बंद कर दिया | प्रणाम स्वरुप वह गणित को छोड़ कर बाकि सरे विषयों में फेल हो गए जिस कारण उन्हें छात्रवृति मिलना बंद हो गयी |
घर की आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण उन्हें आगे पढाई बीच में रोकनी पड़ी | इस बीच उन्होंने अपने जेबखर्च और घर के खर्चे के लिए बच्चो को ट्यूशन पडानी शुरू की | और कुछ वक्त बाद 12वी कक्षा का फॉर्म दुबारा भर के कक्षा पास की | शिक्षा पूरी होने के बाद रामानुजन की ज़िन्दगी में बहुत कष्ट आये |

करीब पांच साल तक उनके घर ने सिर्फ उनके ट्यूशन की कमाई में घर चलाया | पर इन सब कष्टों के बाद भी उन्होंने अपनी गणित में शोध को बंद नहीं किया | गरीबी और भुकमरी का भी उनकी ज़िन्दगी पे कोई असर नहीं पड़ा वह पुरे दिन एक मंदिर में बेठ कर गणित के सवाल हल करते रहते थे |

वर्ष 1908 में  उनके माता पिता ने उनका विवाह करा दिया | विवाह के बाद उनको  निरंतरता के साथ गणित में शोध करने में दिक्कत हो रही थी | जिसके चलते वह मद्रास आ गए नौकरी की तलाश में जहाँ उन्हें रामास्वामी अय्यर मिले, जो की गणित में रूचि रखते थे | उन्होंने रामानुजन की प्रतिभा को पहचाना और उनके लिए एक नौकरी और 25 रूपए की मासिक छात्रवृति का प्रवंध किया | मद्रास में एक साल रहने के बाद उन्होंने अपना पहला शोधपत्र प्रकाशित किया “बरनोली संख्याओ के कुछ गुण” और यह शोधपत्र जर्नल और मैथमेटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने प्रकाशित किया था |


इसी बीच रामानुजन के शोधपत्रो को इंग्लैंड भेजा गया जिसके बाद उनको प्रोफेसर हार्डी ने उन्हें कैंब्रिज विश्वविद्यालय आने को कहा | कुछ कारण वश उन्होंने पहले इसके लिए मना कर दिया पर बाद में प्रोफेसर हार्डी के दुबारा बुलाने पर उन्होंने इंग्लैंड जाने का फैसला किया | इसके बाद उन्होंने प्रोफेसर हार्डी के साथ मिल के काफी शोधपत्र प्रकाशित किये | वह अपना खाना हमेशा खुद ही बनाते थे | इंग्लैंड का वातावरण उनको कुछ खास रास नहीं आया और उनकी तबियत बिगड़ गयी | वह टी.बी रोग से पीड़ित थे | इसके बाद भी उन्होंने अपनी शोध जरी राखी और उनकी इसी मेहनत की चलते उन्हें रॉयल सोसाइटी का फेलो नमकित किया गया |
बिगडती तबियत के चलते उन्होंने अपने देश लौटने का निर्णय किया | घर आने के कुछ समय बाद ही 26 अप्रैल 1920 में उनका टी.बी के कारण ही देहांत हो गया | जब वह मरे तो उनकी आयु कुल 33 वर्ष थी |


भारत के पूर्व प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह जी ने 2012 में  उनकी 125वी सालगिरह पर 22 दिसम्बर को नेशनल मैथमेटिक्स दिवस के रूप में मानाने का ऐलान किया | और साथ ही वर्ष 2012 को मैथमेटिकल वर्ष के रूप में मनाया गया |  

मानुषी चिल्लर का जन्म 14 मई 1997 में हरयाणा में हुआ था | उनके पिता डॉक्टर मित्र बासु चिल्लर भारतीय सरकार के डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन में वैज्ञानिक है और उनकी माँ डॉक्टर नीलम चिल्लर Associate प्रोफेसर है जो की साथ ही हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट Neurochemistry, Institute of Human Behavior and Allied Sciences है |



मानुषी ने अपनी पढाई दिल्ली के St. Thomas School से की और अभी वो सोनीपत के भगत फूल सिंह गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से अपनी पढाई कर रही है | इसके साथ ही उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ  ड्रामा में भी पढाई की है और साथ ही नामी डांसर्स से डांस भी सिखा है | वह एक अच्छी कुचिपुड़ी डांसर भी है |


इससे पहले चिल्लर ने जून 2017 में मिस इंडिया का ख़िताब भी अपने नाम किया था | इसके साथ उन्हें मिस फोटोजेनिक का ख़िताब भी दिया गया था | जिसके बाद उन्होंने मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने का गौरव भी हासिल किया और अब उन्होंने मिस वर्ल्ड का ख़िताब भी अपने नाम करा | वह ऐसा करने वाली 6 भारतीय महिला है | अंतिम बार प्रियंका चोपरा ने वर्ष 2000 में यह ख़िताब अपने नाम किया था |


मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में वह तीन श्रेणीयों में सेमीफाइनल में पहुंची थी जो की टॉप मॉडल, लोगो की पसंद और मल्टीमीडिया कम्पटीशन है | उन्होंने संयुक्त रूप से Beauty with Purpose का ख़िताब भी जीता इसमें उनके प्रोजेक्ट का नाम प्रोजेक्ट शक्ति था | इस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने करीब 20 गाँव में घुमा और करीब 5000 महिलाओ से भी मुलाकात की | इस प्रोजेक्ट का उदेश महिलाओ को Menstrual Hygiene के प्रति जागरूक करना था |



मानुषी से पहले रीता फ़रिया (1966), ऐश्वर्या राय (1994), डायना हेडन (1997), युक्ता मुखी (1999), प्रियंका चोपरा (2000) यह ख़िताब अपने नाम कर चुकी है |

 बेट्टी कोहेन एक अमेरिकी व्यापारी है जिन्हें उनके एनीमेशन विचारधारा के लिए जाना जाता है | इसी विचारधरा के चलते एनीमेशन की दुनिया में कार्टून नेटवर्क का जन्म हुआ | कोहेन का जन्म वर्ष 1950 में हुआ, उन्होंने अपनी पढाई कैलिफ़ोर्निया स्थित स्टैनफोर्ड विश्वविध्यालय से की |



वर्ष 1992 में उन्होंने एनीमेशन की दुनिया में अपना पहला बड़ा कदम रखा जब उन्होंने टेलीविज़न पे कार्टून नेटवर्क की शरुआत की | वह कार्टून नेटवर्क की संस्थापक और अधयक्ष थी | उन्होंने कार्टून नेटवर्क की कमान 1992 से 2001 तक संभाली और इस बीच उन्होंने इस चैनल को पुरे विश्व में इतना प्रसिद्ध कर दिया था की इस चैनल की पुरे विश्व में करीब 3 अरब अमेरिकी डॉलर की सम्पति थी |



कोहेन को शुरआत से ही एनीमेशन और थिएटर में काफी दिलचस्पी थी | वह अपने स्कूली दिनों में थिएटर में भी जाती थी | जब वह अपनी उच्च शिक्षा के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी गयी तो उन्होंने अपना वरिष्ट लेख “चिल्ड्रेन टेलीविज़न वर्कशॉप” पे लिखा था, उन्होंने स्टैनफोर्ड में अपने प्रमुख विषय में संचार पड़ा था |



बेट्टी के निगरानी में कार्टून नेटवर्क ने कुछ नए चैनल भी अपने नेटवर्क में शामिल किये जैसे की तूनामी, कार्टून कार्टून, कार्टून फ्राइडे, कार्टून ऑर्बिट हालाँकि इनमें से कुछ सफल हुए और कुछ नहीं | इसके साथ कुछ सफल कार्टून सीरीज भी शुरू की जैसे की Johnny Bravo, Dexter’s Laboratory, The Powerpuff Girl, Cow and Chicken, Courage The Cowardly Dog. इन सब में से उनका पसंदीदा कार्टून Dexter’s Laboratory है |



9 साल तक कार्टून नेटवर्क को इतने सफलता से चलने के बाद उन्होंने 18 जून 2001 में अपने पद से यह कहते हुए इस्तीफा दिया की उन्हें डर है की कही वो कार्टूनों की रानी बनके न मर जाये | इस इस्तीफे के बाद उन्होंने 2005-2007 तक लाइफटाइम एंटरटेनमेंट के CEO और अधयक्ष का पद संभाला |



अब वह एक व्यापारी है और अपने व्यापर में भी उतना ही नाम कमा रही है जितना की उन्होंने एनीमेशन की दुनिया में कमाया था | उनके एनीमेशन जगत में इस अतुलिन्ये योगदान के लिए उन्हें Mother of Cartoon Network भी बोलते है | 

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