Ashwani Pundhir

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मानुषी चिल्लर का जन्म 14 मई 1997 में हरयाणा में हुआ था | उनके पिता डॉक्टर मित्र बासु चिल्लर भारतीय सरकार के डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन में वैज्ञानिक है और उनकी माँ डॉक्टर नीलम चिल्लर Associate प्रोफेसर है जो की साथ ही हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट Neurochemistry, Institute of Human Behavior and Allied Sciences है |



मानुषी ने अपनी पढाई दिल्ली के St. Thomas School से की और अभी वो सोनीपत के भगत फूल सिंह गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से अपनी पढाई कर रही है | इसके साथ ही उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ  ड्रामा में भी पढाई की है और साथ ही नामी डांसर्स से डांस भी सिखा है | वह एक अच्छी कुचिपुड़ी डांसर भी है |


इससे पहले चिल्लर ने जून 2017 में मिस इंडिया का ख़िताब भी अपने नाम किया था | इसके साथ उन्हें मिस फोटोजेनिक का ख़िताब भी दिया गया था | जिसके बाद उन्होंने मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने का गौरव भी हासिल किया और अब उन्होंने मिस वर्ल्ड का ख़िताब भी अपने नाम करा | वह ऐसा करने वाली 6 भारतीय महिला है | अंतिम बार प्रियंका चोपरा ने वर्ष 2000 में यह ख़िताब अपने नाम किया था |


मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में वह तीन श्रेणीयों में सेमीफाइनल में पहुंची थी जो की टॉप मॉडल, लोगो की पसंद और मल्टीमीडिया कम्पटीशन है | उन्होंने संयुक्त रूप से Beauty with Purpose का ख़िताब भी जीता इसमें उनके प्रोजेक्ट का नाम प्रोजेक्ट शक्ति था | इस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने करीब 20 गाँव में घुमा और करीब 5000 महिलाओ से भी मुलाकात की | इस प्रोजेक्ट का उदेश महिलाओ को Menstrual Hygiene के प्रति जागरूक करना था |



मानुषी से पहले रीता फ़रिया (1966), ऐश्वर्या राय (1994), डायना हेडन (1997), युक्ता मुखी (1999), प्रियंका चोपरा (2000) यह ख़िताब अपने नाम कर चुकी है |

 बेट्टी कोहेन एक अमेरिकी व्यापारी है जिन्हें उनके एनीमेशन विचारधारा के लिए जाना जाता है | इसी विचारधरा के चलते एनीमेशन की दुनिया में कार्टून नेटवर्क का जन्म हुआ | कोहेन का जन्म वर्ष 1950 में हुआ, उन्होंने अपनी पढाई कैलिफ़ोर्निया स्थित स्टैनफोर्ड विश्वविध्यालय से की |



वर्ष 1992 में उन्होंने एनीमेशन की दुनिया में अपना पहला बड़ा कदम रखा जब उन्होंने टेलीविज़न पे कार्टून नेटवर्क की शरुआत की | वह कार्टून नेटवर्क की संस्थापक और अधयक्ष थी | उन्होंने कार्टून नेटवर्क की कमान 1992 से 2001 तक संभाली और इस बीच उन्होंने इस चैनल को पुरे विश्व में इतना प्रसिद्ध कर दिया था की इस चैनल की पुरे विश्व में करीब 3 अरब अमेरिकी डॉलर की सम्पति थी |



कोहेन को शुरआत से ही एनीमेशन और थिएटर में काफी दिलचस्पी थी | वह अपने स्कूली दिनों में थिएटर में भी जाती थी | जब वह अपनी उच्च शिक्षा के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी गयी तो उन्होंने अपना वरिष्ट लेख “चिल्ड्रेन टेलीविज़न वर्कशॉप” पे लिखा था, उन्होंने स्टैनफोर्ड में अपने प्रमुख विषय में संचार पड़ा था |



बेट्टी के निगरानी में कार्टून नेटवर्क ने कुछ नए चैनल भी अपने नेटवर्क में शामिल किये जैसे की तूनामी, कार्टून कार्टून, कार्टून फ्राइडे, कार्टून ऑर्बिट हालाँकि इनमें से कुछ सफल हुए और कुछ नहीं | इसके साथ कुछ सफल कार्टून सीरीज भी शुरू की जैसे की Johnny Bravo, Dexter’s Laboratory, The Powerpuff Girl, Cow and Chicken, Courage The Cowardly Dog. इन सब में से उनका पसंदीदा कार्टून Dexter’s Laboratory है |



9 साल तक कार्टून नेटवर्क को इतने सफलता से चलने के बाद उन्होंने 18 जून 2001 में अपने पद से यह कहते हुए इस्तीफा दिया की उन्हें डर है की कही वो कार्टूनों की रानी बनके न मर जाये | इस इस्तीफे के बाद उन्होंने 2005-2007 तक लाइफटाइम एंटरटेनमेंट के CEO और अधयक्ष का पद संभाला |



अब वह एक व्यापारी है और अपने व्यापर में भी उतना ही नाम कमा रही है जितना की उन्होंने एनीमेशन की दुनिया में कमाया था | उनके एनीमेशन जगत में इस अतुलिन्ये योगदान के लिए उन्हें Mother of Cartoon Network भी बोलते है | 


श्याम सरन नेगी एक नाम ही नहीं बल्कि एक मिसाल है | वह आजाद भारत के पहले मतदाता थे | उन्होंने आजाद भारत का पहला मत दिया था और तब से आज तक वह हमेशा अपना मत का प्रोयोग चुनाव में करते आ रहे है |



श्याम सरन नेगी का जन्म 1 जुलाई सन 1917 में हिमाचल प्रदेश के कालपा शहर में हुआ था | उनका जन्म ऐसे वक्त हुआ था जब भारत में आजादी की जंग अपने चरम पे थी और हर तरफ आजादी के लिए आंदोलन चलाये जा रहे थे | वह इन सब चीजों को देकते देकते ही बड़े हुए | और 15 अगस्त 1947 को वो दिन आ ही गया जब भारत अंग्रेजी शासन से आजाद हो गया |



भारत के आजाद होते ही पुरे देश में ख़ुशी का माहोल था | उसके बाद आजाद भारत को तरक्की की राह पे ले जाने की कोशिशे होने लगी और इसी राह में एक कदम था भारत में आम चुनाव कराना | आजाद भारत में पहले आम चुनाव फरवरी 1952 में पुरे देश को होने थे | परन्तु यह आजादी के बाद पहले चुनाव थे तो सभी चाहते थे की पुरे देश में जितने भी लोग मत डालने के योग्य है वह सभी अपने मत का प्रयोग करे |



हिमाचल प्रदेश के मौसम को देखते हुए, जहाँ फरवरी में भरी बरफ्वारी की आशाएं जताए जा रही थी | भारतीय निर्वाचन आयोग ने हिमाचल में 6 महीने पहले चुनाव करने का फैसला किया | जिस वजह से हिमाचल के लोगो को आजाद भारत में सबसे पहले अपने मत प्रोयोग करने का मौका मिला | हिमाचल में सबसे पहले अपना मत का प्रोयोग करने वाले व्यक्ति थे श्याम सरन नेगी |


इसके बाद तो वह हमेशा ही चुनाव में बड़ चढ़ कर भाग लेते थे | पेशे से वह एक विधालय में शिक्षक थे | इसी साल जुलाई में उन्होंने अपने 100 वर्ष पुरे किये है और वह 2019 में फिर से अपने मत का प्रयोग करने के लिए तयार है |



2010 में, भारतीय निर्वाचन आयोग के कमिश्नर नविन चावला ने उनके गाँव जाकर निर्वाचन आयोग की डायमंड जुबली (Diamond Jubilee) होने पर उन्हें सम्मानित किया | नेगी जी ने बॉलीवुड की फिल्म सनम रे में भी एक खास झलक दी है | 2014 में, गूगल दुवारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने पहले मत का अनुभव लोगो के साथ सजाह किया है और उन्हें अपने मत का प्रोयोग करने के लिए प्रेरित भी किया |      


ब्रह्माण्ड का केंद्र (Center of Universe) अमेरिका के ओक्लाहोमा राज्य के तुलसा शहर डाउनटाउन में है | ब्रह्माण्ड का केंद्र सुनने में तो एक बड़ी सी जगह लगती है पर यह बस एक गोल घेरा ही है जो एक 30 इंच  व्यास (diameter) का एक गोला है जो की कंक्रीट का बना हुआ है | इसकी गोलाई में एक और गोला है जो की लगभग 13 ईंटो से बना हुआ है जिसका व्यास लगभग 8 फीट है |



नाम सुन के ऐसी जगह को देखने का मन करता है पर जब इस जगह आप जायेंगे तो बस यहाँ एक छोटा सा गोला है | दिखने में सिर्फ ये बस एक गोला ही है पर जब इसके बारे जानने को मिलता है तो पता चलता है की एक बहुत ही रेहस्मायी जगह है जिसके ऊपर बहुत सारे वैज्ञानिक शोध कर रहे है | पर वो भी नहीं बता पाए की इस जगह पर ऐसा कारनामा क्यों होता है जो की विज्ञान को पूरी तरह नकार देता है | जिसपे विज्ञान का कोई सा कानून लागु नहीं होता है |



केंद्र के गोल घेरा पे जा कर जब कोई भी व्यक्ति कुछ बोलता है तो वह आवाज सिर्फ उसी व्यक्ति को सुनाई देती है जो की उस घेरे में खड़ा होता है और वो भी काफी तेज़ ध्वनि में गूंजती है और जो लोग बाहर खड़े होते है उन्हें घेरे के अन्दर खड़े व्यक्ति की आवाज सुनाई नहीं देती है | हाँ बाहर वाले लोगो की आवाज घेरे में खड़े व्यक्ति को सुनाई देती है पर वो भी बहुत ही बिगड़े हुए तरीके से, जिससे घेरे में खड़े व्यक्ति को आवाज़ सुनने और समझने में दिक्कत होती है |



वैज्ञानिक आज भी इसकी शोध में लगे हुए है की आखिर ऐसा कैसे होता है, न ही सामने कोई दिवार है और आस पास में भी ऐसे कोई स्तम्भ भी नहीं लगे है जिसकी वजह से ऐसा होता हो | कुछ वैज्ञानिकों का मानना है की ये ब्रह्माण्ड का केंद्र है तो यहाँ ब्रह्माण्ड की सारी उर्जा यहाँ मिलती है जिस वजह से ऐसा होता है | पर इस धटना से जो विज्ञान के काननों का खंडन होता है उस पर वैज्ञानिक आज भी काम कर रहे है |



वैज्ञानिकों का ऐसा भी मानना हैं की यह ध्वनि के प्रभाव की वजह से है जो जगह के हिसाब से बदलती है उस कारण ऐसा होता है और कुछ कहते है की यह परवलयिक परावर्तन (Parabolic Reflectivity) की वजह से होता है |  

   


आज के इस दौर में वक़्त और ज़माना बहुत ही तेज़ी से बदल रहे है | और अगर आपने अपने आप को इस बदलते वक़्त के साथ नहीं ढाला तो आप इस आधुनिक युग में काफी पीछे रह जायेंगे | इस युग में आज के समय पे सभी काम इंटरनेट पे बड़े ही आराम से हो रहे है तो फिर पैसो का लेन देन कैसे पीछे रह सकता है |



इस पैसे के लेन देन को और सुखद बनाने के लिए सरकार और बैंकों मिल कर कई सारी नई योजनाए लाते रहते है | जैसे की पहले Debit Card और Credit Card जिससे की दुकानों और शोरूमों में पेमेंट करना आसन हो गया | उसके बाद Internet Banking आया जिससे की बिना कार्ड के ही पेमेंट हो जाती थी | उसके बाद आया e-wallet का जमाना जिसमें की Paytm, Freecharge, PhonePe और भी बहुत सारी apps ने नाम और पैसा दोनों ही कमाया |


और अब इस छेत्र में सरकार और बैंकों ने मिल कर एक और नया तरीका निकला है जिसका नाम है UPI (Unified Payments Interface) जो की NPCI (National Payments Corporation of India) के नियमो अनुसार काम करता है | यह सबसे नया और सबसे बेहतर तरीका है किसी भी तरीके का पेमेंट और transaction करने के लिए | इस तरीके को बढावा देने के लिए सरकार ने अपना app भी निकला है जिसका नाम है BHIM (Bharat Interface for Money). इसी मुहीम का सपोर्ट करते हुए गूगल ने भी एक app निकला TEZ. साथ में सारी e-wallet apps ने भी इस तरीके को apps में शामिल कर लिए है |



UPI को इस्तेमाल करना बहुत ही आसन हैं | इसके लिए आपको बस अपने बैंक अकाउंट से जुड़े हुए मोबाइल नंबर को इस app में डालना है इसके बाद आपके मोबाइल नंबर पर एक OTP आयेगा जिसको डालते ही आपको आपकी UPI ID मिल जाएगी | इस ID के मिलते ही आप किसी भी ऑनलाइन पेमेंट में इसको प्रयोग कर सकते है |



जैसा की अब बैंकों ने यह जरुरी कर दिया है की आप अपना आधार कार्ड और पैन कार्ड को अपने बैंक अकाउंट से लिंक कराये,  इस चीज़ का फायदा भी UPI से पेमेंट करने पे मिलता है |


 जैसे की अगर आपको किसी को पेमेंट करना है और आप उस व्यक्ति का आधार नंबर जानते है तो सिर्फ उस व्यक्ति का आधार नंबर डालते ही उस व्यक्ति का नाम और अकाउंट नंबर आ जायेगा और एक बटन दबाते ही आपका पैसा उस व्यक्ति के पास ट्रान्सफर को जायेगा |


पैसे के लेन देन के इस तरीके को सभी कंपनीयों ने और बैंकों ने सपोर्ट किया है | साथ ही इससे कैशलेस पेमेंट में भी बढावा होगा और साथ ही Make In India और Digital India कैंपेन को भी बढावा मिलेगा |

सतोशी तजीरी जापान के एक बहुत बड़े वीडियो गेम डेवलपर्स में से एक है | इनका जन्म 28 अगस्त 1965 में मचिदा, टोक्यो, जापान में हुआ था | उन्होंने बहुत सरे गेम्स डिजाईन किये मगर उनमें से सबसे ज्यादा पोकेमोन और मारिओ लोकप्रिय हुए | उन्होंने बहुत कम उम्र में ही गेम डिजाइनिंग कंपनी Game Freak में काम करना शुरू किया जिसकी वजह उनका विडियो गेम्स के प्रति लगाव था |



सतोशी को बचपन से ही कीड़े और छोटे पशुओं और पक्षियों को पकड़ने का शौक था | और वह बड़े होके इसी क्षेत्र में आगे जाना चाहते थे पर ऐसा हो न सका | उन्होंने लगभग 2 बार में अपनी हाई स्कूल की पड़ी पूरी की और उसके बाद कोई नौकरी करने की जगह वह Tokyo National College of Technology चले गए जहाँ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटर में 2 साल का डिप्लोमा कोर्स किया |



महज 17 साल की उम्र में उन्होंने Game Freak के लिए काम करना शुरू किया | उन्होंने पहले कंपनी के लिए मैगज़ीन लिखने का काम किया | तजीरी उसमें पोकेमोनो को बनाते और उनके बारे में लिखते थे | तजीरी को आर्कड़े गेम्स से खासा लगाव था, जिसके चलते ही उन्होंने पोकेमोन पर काम करना शुरू किया | उन्हें बचपन से ही कीड़े पकड़ने का शौक था जो की उन्होंने इस गेम में भी दिखाया | ये काम उन्होंने केम सुगिमोरी के साथ शुरू किया जिन्होंने की पोकेमोन गेम शुरू होने के बाद पहले 150 पोकेमोनो के बारे में बताया था |



अब सतोशी एक मैगज़ीन लेखक से ज्यादा गेम डेवलपर बन चुके थे | उन्होंने 1989 में गेम फ्रिक को गेम डेवलपर कंपनी की तरह से प्रयोग किया | 1990 में उन्होंने अपना मह्त्वकंशी गेम पोकेमोन पर काम शुरू किया और उन्हें इसे पूरा करने में 6 साल का वक़्त लगा, पर इसपे किसी ने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया | पर धीमे धीमे इस गेम ने रफ़्तार पकड़ी और यह बच्चो के बीच में काफी प्रसिद्ध हो गया | पर इस गेम में एक कमी थी जब कोई पोकेमोन हरता था तो वो मर जाता था | जिसमें की बाद में बदलाव किया गया | पोकेमोन को मरने की जगह थका हुआ हो जाता था | बाद में इस बदलाब से गेम को काफी फायदा हुआ और गेम की लोकप्रियेता और बड गयी | 

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